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कुछ भी तो कहो

अब 

कुछ देखो 

तो कुछ कहो न 

तब मूँछें छोटी हों या बड़ी 

खूब रौबदार चौकीदार थीं 

अब न गांधारी बनना है 

न गूंगी का 

अभिनय करना है 

वक़्त छले जाने का बीत गया है  

-सरिता स्निग्ध ज्योत्स्ना

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