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और वो खुद ही बन गई एक ख़बर

कभी कभी ख़बर बनानेवाले ही खुद ख़बर बन जाते हैं।शनिवार को कुछ ऐसा ही वाकया हुआ एक न्यूज़ चैनल आईबीसी 24 की एंकर सुप्रीत कौर के साथ ।छत्तीसगढ के इस चैनल पर सुबह की बुलेटिन पढ़ रही सुप्रीत को सड़क दुर्घटना संबंधित ख़बर को पढ़ते समय यह अंदाजा लग चुका था कि तीन मृतकों में से एक उनके पति हर्षद भी हैं ।लेकिन एक एंकर की जिम्मेदारी से पूरी तरह अवगत थीं ।इसलिए इस ब्रेकिंग न्यूज़ के बाद भी अपनी बुलेटिन पूरी की और न्यूज रूम में जाकर ही कन्फर्म होने के बाद फफक पड़ी।दरअसल उनके सहयोगियों को यह बुरी ख़बर पता चल चुकी थी पर इसे उन्हें बताना बहुत मुश्किल रहा होगा ।एक वर्ष पूर्व ही विवाहित सुप्रीत पर क्या गुज़री होगी ,यह समझना मुश्किल नहीं है।

अभी  कुछ दिन पहले ही विविध भारती की मशहूर एंकर रेडियो सखी ममता सिंह ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा था कि जब हम ऑन एयर होते हैं , तो अपनी निजी जिम्मेदारियों ,तनावों -दबावों को पीछे छोड़ आते हैं।बात बिल्कुल  सही है ।चाहे वह आरजे हो या न्यूज एंकर माइक्रोफोन पर आते ही वे एक सामान्य इंसान नहीं रह जाते हैं ।उनकी दुनिया बस अपनी ड्यूटी के इर्द-गिर्द रह जाती है ।जहाँ थोड़ा-सा दिमाग इधर उधर हुआ कि शब्दों के हेर फेर से सब कुछ गड्डमगड्ड हो सकता है ।जहाँ रेडियो की दुनिया में आवाज़ पर ध्यान देना होता है, वहीं टीवी में आवाज़ के साथ साथ बाडी लैंग्वेज भी मायने रखता है ।जो भी है ध्यान को केंद्रित रखना दोनों जगह ज़रूरी है ।मैंने भी आकाशवाणी में न्यूज़ रीडिंग के दौरान यही महसूस किया ।अपनी छोटी सी पाँच- छः माह की बिटिया को घर पर छोड़कर नाइट ड्यूटी करने  जाना भी दिल पर पत्थर रखना ही होता है ।इसलिए जब भी कैजुअल ड्यूटी लगती थी ,उसके लिए दूध का पूरा इंतजाम कर ही जाती थी।फिर भी ध्यान उधर ही ज़्यादा रहता था ,इसलिए कोशिश होती थी कि ड्यूटी कम ही लूं।आखिर जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से होना ही चाहिए ।इसी तरह एक हाथ में एक से अधिक चूड़ी न हो ,इसका भी ध्यान रखना होता था ।ऑन एयर अनावश्यक ध्वनि प्रसारित न हो ,इसका ध्यान भी ख़ूब रखना होता है ।खाँसी से बचने के लिए अक्सर लौंग मेरे पर्स में होती थी ।यानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया महज़ ग्लैमर नहीं ,जिम्मेदारियों से युक्त भी है । घोर प्रतिस्पर्धा से यह क्षेत्र भी अछूता नहीं है ।यहाँ भी अपने हुनर को लगातार माँजना पड़ता है ,तभी कोई टिक पाता है ।
निस्संदेह, सुप्रीत ने खुद को संभालकर,अपनी त्रासदीपूर्ण परिस्थिति की आशंका को परे रखते हुए अपना कर्त्तव्य निर्वहन कर मीडिया का सिर ऊँचा किया है ।साथ ही ,एक महिला की धैर्य शक्ति का भी बखूबी परिचय दिया है ।'इस जनम की बिटिया' की ओर से इस बहादुर नारी शक्ति को सलाम !
-सरिता स्निग्ध ज्योत्स्ना






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