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.............तो बची रहेगी पूजा

सुना है  एक अमीर ने , कर दिया है  महादान

दिया है अपनी बिटिया को, बहुत बड़ा ईनाम


चर्चा बहुत हुई  उसकी ,   हो तुम भी  सावधान 

सीखो समाज के रहनुमाओं, बेटी का रखो मान


क्या हुआ  जो नहीं हम, जुकरबर्ग जैसा धनवान

पूजते थे हम भी  उन्हें , घरों  की  थी आन-शान


सुनो ग़ौर से अजन्मी चीखें ,  यूं मत बनो हैवान 

नन्हीं लाशों से पटी है धरती,   कहाँ गया इंसान 


हमने तो कर दी है ज़िन्दगी, अपनी बेटियों के नाम

छेड़ते हैं फिर भी लोग, कब लाओगे घर का  चिराग़ 


अरे नादानों, फेंक दो, सवाल, कैंची- तेज औजार 

खुद के अंदर झांको ,फिर हो गौरी का  मंत्रोच्चार


कल ढूंढ़ते रह जाओगे ,  बेटों के  शरीक-ए-हयात 

बड़ी कीमती हैं बेटियाँ, बचा लो न घर घर का चाँद 

-सरिता स्निग्ध ज्योत्स्ना, 

चैत्र महाष्टमी ,2016


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